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mahabharat 12.177.49: ‘मनुष्य को कामसम्बन्धी समस्त रजोगुणों का परित्याग कर देना चाहिए। शोक, निर्लज्जता और असन्तोष, ये सब काम और क्रोध के ही परिणाम हैं।॥49॥   |   mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.177.49 
कामानुबन्धं नुदते यत् किंचित् पुरुषो रज:।
कामक्रोधोद्भवं दु:खमह्रीररतिरेव च॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
‘मनुष्य को कामसम्बन्धी समस्त रजोगुणों का परित्याग कर देना चाहिए। शोक, निर्लज्जता और असन्तोष, ये सब काम और क्रोध के ही परिणाम हैं।॥49॥
 
‘A man should get rid of all the Rajoguna that is related to Kama. Sorrow, shamelessness and discontentment are the result of Kama and anger.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)