Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.177.47: अब मैं कामना और लोभ का त्याग करके प्रत्यक्ष सुखी हो गया हूँ; अतः इन्द्रियों को वश में करने वाले पुरुष की भाँति अब मैं लोभ में फँसकर दुःख नहीं उठाऊँगा॥ 47॥ | mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब मैं कामना और लोभ का त्याग करके प्रत्यक्ष सुखी हो गया हूँ; अतः इन्द्रियों को वश में करने वाले पुरुष की भाँति अब मैं लोभ में फँसकर दुःख नहीं उठाऊँगा॥ 47॥
‘Having now renounced desire and greed, I have become visibly happy; therefore, like a man who has conquered his senses, I will no longer suffer by being entangled in greed.॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥