Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.177.44: मैं सदैव संतुष्ट रहूँगा, स्वस्थ इन्द्रियों से युक्त रहूँगा और जो कुछ संयोग से मिल जाए, उसी से जीवन निर्वाह करूँगा; परन्तु मैं तुम्हें कभी सफल नहीं होने दूँगा; क्योंकि तुम मेरे शत्रु हो॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं सदैव संतुष्ट रहूँगा, स्वस्थ इन्द्रियों से युक्त रहूँगा और जो कुछ संयोग से मिल जाए, उसी से जीवन निर्वाह करूँगा; परन्तु मैं तुम्हें कभी सफल नहीं होने दूँगा; क्योंकि तुम मेरे शत्रु हो॥ 44॥
‘I will always be content and endowed with healthy senses and will continue to live on whatever I get by chance; but I will never let you succeed; because you are my enemy.॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥