क्षमिष्ये क्षिपमाणानां न हिंसिष्ये विहिंसित:।
द्वेष्ययुक्त: प्रियं वक्ष्याम्यनादृत्य तदप्रियम्॥ ४३॥
अनुवाद
अब मैं उन लोगों के व्यवहार को चुपचाप सहन कर लूँगा जो मेरी निन्दा करेंगे या मेरा अपमान करेंगे । जो मुझे मारेंगे या मुझे कष्ट देंगे, उनसे मैं प्रतिशोध नहीं लूँगा । यदि कोई द्वेषपूर्ण व्यक्ति भी मेरे साथ आ जाए और वह मुझे अप्रिय वचन कहने लगे, तो भी मैं उसकी उपेक्षा करूँगा और उसे अप्रिय वचन नहीं कहूँगा ॥ 43॥
‘Now I will silently tolerate the behaviour of those who will criticise me or insult me. I will not retaliate against those who will beat me or torment me. Even if a person worthy of hatred joins me and he starts saying unpleasant words to me, I will ignore him and will not say unpleasant words to him.॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥