श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.177.42 
परित्यजामि काम त्वां हित्वा सर्वमनोगती:।
न त्वं मया पुन: काम वत्स्यसे न च रंस्यसे॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
काम! मैं अपने समस्त विचारों को त्यागकर तुम्हें त्याग रहा हूँ। अब तुम न तो मेरे साथ रह सकोगे और न ही मेरे साथ रमण कर सकोगे ॥ 42॥
 
‘Kama! I am abandoning you by putting away all my thoughts. Now you will neither be able to live with me nor have fun with me. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)