अवज्ञानसहस्रैस्तु दोषा: कष्टतराऽधने।
धने सुखकला या तु सापि दु:खैर्विधीयते॥ ३५॥
अनुवाद
दरिद्र को हजारों अपमान सहने पड़ते हैं; इसलिए दरिद्र अवस्था में अनेक दुःखदायी दोष होते हैं; तथा जो सुख धन में प्रकट होता है, वह भी दुःखों से ही प्राप्त होता है॥ 35॥
‘The poor have to endure thousands of insults; hence the poverty-stricken state has many painful defects; and the trace of happiness which appears in wealth is also achieved through sorrows.॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥