धननाशेऽधिकं दु:खं मन्ये सर्वमहत्तरम्।
ज्ञातयो ह्यवमन्यन्ते मित्राणि च धनाच्च्युतम्॥ ३४॥
अनुवाद
मैं मानता हूँ कि सबसे बड़ा दुःख वह है जो धन के नष्ट हो जाने पर होता है; क्योंकि जो धन से वंचित हो जाता है, उसका अपने भाई-बन्धु और मित्र भी अपमान करते हैं॥ 34॥
‘I believe that the greatest sorrow is the one which comes when one's wealth is destroyed; because the one who is deprived of wealth is insulted even by his own siblings and friends.॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥