Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.177.33: काम! इच्छा, शोक और परिश्रम - इनके मूल आप ही हैं। जब तक आप मुझे प्रेरणा देते रहेंगे और इधर-उधर भटकाते रहेंगे, तब तक मेरे लिए कोई दूसरा मार्ग नहीं है॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वया हि मे प्रणुन्नस्य गतिरन्या न विद्यते।
तृष्णाशोकश्रमाणां हि त्वं काम प्रभव: सदा॥ ३३॥
अनुवाद
काम! इच्छा, शोक और परिश्रम - इनके मूल आप ही हैं। जब तक आप मुझे प्रेरणा देते रहेंगे और इधर-उधर भटकाते रहेंगे, तब तक मेरे लिए कोई दूसरा मार्ग नहीं है॥ 33॥
‘Kama! Desire, grief and hard work – you are the source of these. As long as you keep inspiring me and making me wander here and there, there is no other way for me.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥