य इमं मामकं देहं भूतग्राम: समाश्रित:।
स यात्वितो यथाकामं वसतां वा यथासुखम्॥ २९॥
अनुवाद
मेरे शरीर में आश्रय लिए हुए पंचतत्वों का समूह चाहे अपनी इच्छा से इससे दूर चला जाए अथवा इसमें रहे, इससे मेरा कोई सरोकार नहीं है ॥29॥
'The group of five elements which have taken shelter in my body, whether they go away from it according to their wish or stay in it, it is not my concern. ॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥