श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.177.25 
काम जानामि ते मूलं संकल्पात् किल जायसे।
न त्वां संकल्पयिष्यामि समूलो न भविष्यसि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
काम! मैं तुम्हारा मूल जानता हूँ। तुम निश्चय ही संकल्प से उत्पन्न हुए हो। अब मैं तुम्हारा चिन्तन भी नहीं करूँगा, जिससे तुम्हारा सर्वथा नाश हो जाएगा॥ 25॥
 
'Kama! I know your root. You are definitely born from a thought. Now I will not even think about you, due to which you will be completely destroyed.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)