श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.177.24 
जानामि काम त्वां चैव यच्च किंचित् प्रियं तव।
तवाहं प्रियमन्विच्छन्नात्मन्युपलभे सुखम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
काम! मैं तुम्हें भली-भाँति जानता हूँ और यह भी जानता हूँ कि तुम्हें क्या प्रिय है। मैं बहुत समय से तुम्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न कर रहा हूँ; परन्तु मेरे मन में कभी भी प्रसन्नता नहीं हुई॥ 24॥
 
‘Kama! I know you very well and I am also aware of what you like. I have been trying to please you for a long time; but I have never experienced happiness in my mind.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)