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mahabharat 12.177.23: काम! तुम्हारा हृदय निश्चय ही फौलाद का बना है, इसलिए वह अत्यंत दृढ़ है। यही कारण है कि सैकड़ों विपत्तियों से पीड़ित होने पर भी वह सैकड़ों टुकड़ों में नहीं टूटता॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.177.23 
नूनं ते हृदयं काम वज्रसारमयं दृढम्।
यदनर्थशताविष्टं शतधा न विदीर्यते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
काम! तुम्हारा हृदय निश्चय ही फौलाद का बना है, इसलिए वह अत्यंत दृढ़ है। यही कारण है कि सैकड़ों विपत्तियों से पीड़ित होने पर भी वह सैकड़ों टुकड़ों में नहीं टूटता॥ 23॥
 
‘Kama! Your heart is definitely made of steel; hence it is extremely strong. This is the reason that despite being afflicted by hundreds of calamities, it does not break into hundreds of pieces.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)