Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.177.22: भूतकाल और भविष्यकाल के मनुष्य कभी भी अपनी कामनाओं का अंत नहीं कर पाए हैं। इसलिए मैंने समस्त कर्म-योजनाओं को त्याग दिया है और मैं पूर्णतः जागृत हो गया हूँ। ॥22॥ | mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न पूर्वे नापरे जातु कामानामन्तमाप्नुवन्।
त्यक्त्वा सर्वसमारम्भान् प्रतिबुद्धोऽस्मि जागृमि॥ २२॥
अनुवाद
भूतकाल और भविष्यकाल के मनुष्य कभी भी अपनी कामनाओं का अंत नहीं कर पाए हैं। इसलिए मैंने समस्त कर्म-योजनाओं को त्याग दिया है और मैं पूर्णतः जागृत हो गया हूँ। ॥22॥
'Men of the past and the future have never been able to end their desires. So, I have given up all plans of action and have become alert and have awakened completely. ॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥