भीष्म उवाच
सर्वसाम्यमनायासं सत्यवाक्यं च भारत।
निर्वेदश्चाविधित्सा च यस्य स्यात् स सुखी नर:॥ २॥
अनुवाद
भीष्मजी बोले - हे भारत! सबमें समता का भाव, व्यर्थ परिश्रम का अभाव, सत्यभाषण, संसार से विरक्ति और कर्म-वासना का अभाव - ये पाँचों गुण जिस पुरुष में विद्यमान हैं, वही सुखी है॥2॥
Bhishmaji said – India! A sense of equality in all, absence of useless labour, speaking the truth, detachment from the world and absence of lust for action - the person who has all these five is happy. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥