श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.177.19 
यदि नाहं विनाश्यस्ते यद्येवं रमसे मया।
मा मां योजय लोभेन वृथा त्वं वित्तकामुक॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे धन-लोलुप मन! यदि तू मुझे नष्ट नहीं करना चाहता, यदि तू मेरे साथ इसी प्रकार सुखपूर्वक रहना चाहता है, तो मुझे व्यर्थ लोभ में मत उलझा॥19॥
 
‘O wealth-seeking mind! If you do not wish to destroy me, if you wish to live happily with me like this, then do not entangle me in useless greed.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)