Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.177.16: जो मनुष्य अपनी सम्पूर्ण कामनाओं को प्राप्त कर लेता है और जो उनका त्याग कर देता है - इन दोनों में से सम्पूर्ण कामनाओं का त्याग, उनकी प्राप्ति से श्रेष्ठ है ॥16॥ | mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य अपनी सम्पूर्ण कामनाओं को प्राप्त कर लेता है और जो उनका त्याग कर देता है - इन दोनों में से सम्पूर्ण कामनाओं का त्याग, उनकी प्राप्ति से श्रेष्ठ है ॥16॥
"The man who attains all his desires and the one who simply renounces them - of the two, renunciation of all desires is better than attainment of them. ॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥