श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.177.16 
य:कामानाप्नुयात् सर्वान्यश्चैतान्केवलांस्त्यजेत्।
प्रापणात् सर्वकामानां परित्यागो विशिष्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी सम्पूर्ण कामनाओं को प्राप्त कर लेता है और जो उनका त्याग कर देता है - इन दोनों में से सम्पूर्ण कामनाओं का त्याग, उनकी प्राप्ति से श्रेष्ठ है ॥16॥
 
"The man who attains all his desires and the one who simply renounces them - of the two, renunciation of all desires is better than attainment of them. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)