Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.176.9: जब मैं तीनों लोकों पर दृष्टि डालता हूँ, तो मुझे उस पुरुष के समान कोई नहीं दिखाई देता जो सब प्रकार से निर्धन, पवित्र और वैराग्य से युक्त है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.176.9 
अकिंचनस्य शुद्धस्य उपपन्नस्य सर्वत:।
अवेक्षमाणस्त्रीँल्लोकान् न तुल्यमिह लक्षये॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब मैं तीनों लोकों पर दृष्टि डालता हूँ, तो मुझे उस पुरुष के समान कोई नहीं दिखाई देता जो सब प्रकार से निर्धन, पवित्र और वैराग्य से युक्त है॥9॥
 
'When I cast my gaze upon the three worlds, I do not see anyone like the man who is poor, pure and full of detachment in all respects.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)