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mahabharat 12.176.4: ‘इस संसार में जो कोई जन्म लेता है (चाहे वह धनवान हो या निर्धन) वह जन्म से ही अनेक प्रकार के सुख-दुःख भोगता है।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.176.4 
उत्पन्नमिह लोके वै जन्मप्रभृति मानवम्।
विविधान्युपवर्तन्ते दु:खानि च सुखानि च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘इस संसार में जो कोई जन्म लेता है (चाहे वह धनवान हो या निर्धन) वह जन्म से ही अनेक प्रकार के सुख-दुःख भोगता है।॥4॥
 
‘Whoever is born in this world (be it rich or poor) experiences various kinds of joys and sorrows right from his birth.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)