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इत्येतद्धास्तिनपुरे ब्राह्मणेनोपवर्णितम्।
शम्पाकेन पुरा मह्यं तस्मात् त्याग: परो मत:॥ २३॥
अनुवाद
इस प्रकार हस्तिनापुर में शम्पाक नामक ब्राह्मण ने मुझसे त्याग का माहात्म्य कहा था, अतः त्याग ही श्रेष्ठ माना गया है॥ 23॥
In this manner, a Brahmin named Shampak had narrated to me the greatness of renunciation in Hastinapur. Hence, renunciation is considered to be the best.॥ 23॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शम्पाकगीतायां षट्सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शम्पाकगीताविषयक एक सौ छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥