Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.176.13: वह सदैव भगवान की इच्छा के अनुसार ही चलता है। वह बिना बिस्तर के भूमि पर सोता है। वह अपनी भुजाओं को तकिया बनाकर रखता है और सदैव शान्त रहता है। देवता भी उसकी बहुत प्रशंसा करते हैं॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं वै सदा कामचरमनुपस्तीर्णशायिनम्।
बाहूपधानं शाम्यन्तं प्रशंसन्ति दिवौकस:॥ १३॥
अनुवाद
वह सदैव भगवान की इच्छा के अनुसार ही चलता है। वह बिना बिस्तर के भूमि पर सोता है। वह अपनी भुजाओं को तकिया बनाकर रखता है और सदैव शान्त रहता है। देवता भी उसकी बहुत प्रशंसा करते हैं॥13॥
‘He always moves according to the will of the God. He sleeps on the ground without a bed. He uses his arms as a pillow and always remains calm. Even the gods praise him a lot.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥