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mahabharat 12.176.11: दरिद्रता और राज्य में सबसे बड़ा अंतर यह है कि धनवान राजा सदैव इस प्रकार चिंतित रहता है मानो वह मृत्यु के मुँह में पड़ा हो ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.176.11 
आकिंचन्ये च राज्ये च विशेष: सुमहानयम्।
नित्योद्विग्नो हि धनवान् मृत्योरास्यगतो यथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दरिद्रता और राज्य में सबसे बड़ा अंतर यह है कि धनवान राजा सदैव इस प्रकार चिंतित रहता है मानो वह मृत्यु के मुँह में पड़ा हो ॥11॥
 
'The biggest difference between poverty and a kingdom is that a rich king is always worried as if he is lying in the jaws of death. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)