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mahabharat 12.175.d2: कौन जाने आज किसकी मृत्यु का समय आ जाए? सम्पूर्ण जगत पर आधिपत्य रखने वाली मृत्यु जब किसी को ले जाना चाहती है, तो उसे पहले से बुलाती नहीं। जैसे मछुआरे चुपके से आकर मछलियाँ पकड़ते हैं, वैसे ही मृत्यु भी अज्ञात रहकर आक्रमण करती है।   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.175.d2 
को हि जानाति कस्याद्य मृत्युकालो भविष्यति।
(न मृत्युरामन्त्रयते हर्तुकामो जगत‍्प्रभु:।
अबुद्ध एवाक्रमते मीनान् मीनग्रहो यथा॥ )
 
 
अनुवाद
कौन जाने आज किसकी मृत्यु का समय आ जाए? सम्पूर्ण जगत पर आधिपत्य रखने वाली मृत्यु जब किसी को ले जाना चाहती है, तो उसे पहले से बुलाती नहीं। जैसे मछुआरे चुपके से आकर मछलियाँ पकड़ते हैं, वैसे ही मृत्यु भी अज्ञात रहकर आक्रमण करती है।
 
Who knows whose time of death will come today? When death, which has dominion over the entire world, wants to take someone away, it does not invite him beforehand. Just like fishermen come stealthily and catch fish, in the same way death also attacks while remaining unknown.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)