Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.175.8: पिता ने पूछा, "बेटा! तुम मुझे क्यों डरा रहे हो? बताओ, इस संसार को कौन मार रहा है, किसने इसे घेर रखा है और यहाँ कौन लोग हैं जो सफलतापूर्वक अपना काम कर रहे हैं और अपना जीवन जी रहे हैं?"   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.175.8 
पितोवाच
कथमभ्याहतो लोक: केन वा परिवारित:।
अमोघा: का: पतन्तीह किं नु भीषयसीव माम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पिता ने पूछा, "बेटा! तुम मुझे क्यों डरा रहे हो? बताओ, इस संसार को कौन मार रहा है, किसने इसे घेर रखा है और यहाँ कौन लोग हैं जो सफलतापूर्वक अपना काम कर रहे हैं और अपना जीवन जी रहे हैं?"
 
The father asked, "Son! Why are you frightening me? Tell me, who is killing this world, who has surrounded it and who are the people here who are successfully doing their work and living their lives?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)