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mahabharat 12.175.4: वह मोक्ष, धर्म और अर्थ में कुशल था और प्रजातंत्र के सिद्धांतों में पारंगत था। एक दिन उस पुत्र ने स्वाध्याय में तत्पर अपने पिता से कहा॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.175.4 
सोऽब्रवीत् पितरं पुत्र: स्वाध्यायकरणे रतम्।
मोक्षधर्मार्थकुशलो लोकतत्त्वविचक्षण:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वह मोक्ष, धर्म और अर्थ में कुशल था और प्रजातंत्र के सिद्धांतों में पारंगत था। एक दिन उस पुत्र ने स्वाध्याय में तत्पर अपने पिता से कहा॥4॥
 
He was skilled in salvation, religion and artha and was well versed in the principles of democracy. One day that son said to his father who was devoted to self-study. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)