Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.175.39: भीष्म कहते हैं - हे पुरुषों! अपने पुत्र के ये वचन सुनकर पिता ने सत्य धर्म का कर्तव्य निभाया था। उसी प्रकार आप भी सत्य धर्म में तत्पर होकर उचित आचरण करें।॥39॥ | mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
पुत्रस्यैतद् वच: श्रुत्वा यथाकार्षीत् पिता नृप।
तथा त्वमपि वर्तस्व सत्यधर्मपरायण:॥ ३९॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे पुरुषों! अपने पुत्र के ये वचन सुनकर पिता ने सत्य धर्म का कर्तव्य निभाया था। उसी प्रकार आप भी सत्य धर्म में तत्पर होकर उचित आचरण करें।॥39॥
Bhishma says - O Lord of men! On hearing these words of his son, the father had performed the duty of true religion. In the same way, you too should behave in the proper manner by being devoted to true religion. ॥ 39॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि पितापुत्रसंवादकथने पञ्चसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें पिता और पुत्रके संवादका कथनविषयक एक सौ पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४० १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥