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mahabharat 12.175.36: यद्यपि मैं निःसंतान हूँ, फिर भी मैं भगवान से उत्पन्न हुआ हूँ और भगवान में स्थित हूँ। भविष्य में भी मैं आत्मा में ही लीन रहूँगा। बच्चे मुझे पार नहीं पहुँचाएँगे ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.175.36 
आत्मन्येवात्मना जात आत्मनिष्ठोऽप्रजोऽपि वा।
आत्मन्येव भविष्यामि न मां तारयति प्रजा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि मैं निःसंतान हूँ, फिर भी मैं भगवान से उत्पन्न हुआ हूँ और भगवान में स्थित हूँ। भविष्य में भी मैं आत्मा में ही लीन रहूँगा। बच्चे मुझे पार नहीं पहुँचाएँगे ॥ 36॥
 
Even though I am childless, I am born from God and am situated in God. In the future too I will be absorbed in the soul. Children will not help me cross over. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)