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mahabharat 12.175.35: इस संसार में ज्ञान के समान कोई नेत्र नहीं है, सत्य के समान कोई तप नहीं है, राग-क्रोध के समान कोई दुःख नहीं है और त्याग के समान कोई सुख नहीं है ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.175.35 
नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति सत्यसमं तप:।
नास्ति रागसमं दु:खं नास्ति त्यागसमं सुखम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में ज्ञान के समान कोई नेत्र नहीं है, सत्य के समान कोई तप नहीं है, राग-क्रोध के समान कोई दुःख नहीं है और त्याग के समान कोई सुख नहीं है ॥35॥
 
In this world there is no eye like knowledge, there is no austerity like truth, there is no sorrow like attachment and anger and there is no happiness like renunciation. ॥35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)