Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.175.34: जिसकी वाणी और मन सदैव एकाग्र रहते हैं तथा जो त्याग, तप और सत्य से परिपूर्ण है, वह निश्चय ही सब कुछ प्राप्त कर सकता है ॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.175.34 
यस्य वाङ्मनसी स्यातां सम्यक्प्रणिहिते सदा।
तपस्त्यागश्च सत्यं च स वै सर्वमवाप्नुयात्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जिसकी वाणी और मन सदैव एकाग्र रहते हैं तथा जो त्याग, तप और सत्य से परिपूर्ण है, वह निश्चय ही सब कुछ प्राप्त कर सकता है ॥ 34॥
 
He whose speech and mind are always well concentrated and who is full of renunciation, austerity and truth, can certainly achieve everything. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)