Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.175.31: अतः अब मैं हिंसा से दूर रहकर सत्य की खोज करूँगा। मैं अपने हृदय से काम और क्रोध को दूर कर दूँगा तथा दुःख और सुख में सम रहूँगा। सबका उपकार करके मैं देवताओं के समान मृत्यु के भय से मुक्त हो जाऊँगा। ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः अब मैं हिंसा से दूर रहकर सत्य की खोज करूँगा। मैं अपने हृदय से काम और क्रोध को दूर कर दूँगा तथा दुःख और सुख में सम रहूँगा। सबका उपकार करके मैं देवताओं के समान मृत्यु के भय से मुक्त हो जाऊँगा। ॥31॥
Therefore, I will now stay away from violence and search for the truth. I will remove lust and anger from my heart and remain equal in sorrow and happiness. By becoming beneficial to everyone, I will become free from the fear of death like the gods. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥