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mahabharat 12.175.30: इस शरीर में अमृत और मृत्यु दोनों स्थित हैं। मनुष्य आसक्ति से मृत्यु को और सत्य से अमरता को प्राप्त करता है ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.175.30 
अमृतं चैव मृत्युश्च द्वयं देहे प्रतिष्ठितम्।
मृत्युमापद्यते मोहात् सत्येनापद्यतेऽमृतम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इस शरीर में अमृत और मृत्यु दोनों स्थित हैं। मनुष्य आसक्ति से मृत्यु को और सत्य से अमरता को प्राप्त करता है ॥30॥
 
Both nectar and death are situated in this body. Man attains death through attachment and immortality through truth. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)