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mahabharat 12.175.3: कुन्तीकुमार! प्राचीन काल में एक ब्राह्मण थे जो सदैव वेद-शास्त्रों के अध्ययन में तत्पर रहते थे। उनका एक पुत्र था जो न केवल गुणों से, बल्कि नाम से भी बड़ा तेजस्वी था।   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.175.3 
द्विजाते: कस्यचित् पार्थ स्वाध्यायनिरतस्य वै।
बभूव पुत्रो मेधावी मेधावी नाम नामत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार! प्राचीन काल में एक ब्राह्मण थे जो सदैव वेद-शास्त्रों के अध्ययन में तत्पर रहते थे। उनका एक पुत्र था जो न केवल गुणों से, बल्कि नाम से भी बड़ा तेजस्वी था।
 
Kuntikumar! In ancient times there was a Brahmin who was always devoted to the study of the Vedas and scriptures. He had a son who was not only brilliant by his qualities but also by his name.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)