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mahabharat 12.175.29: अतः मनुष्य को सत्यव्रत का पालन करना चाहिए। सत्ययोग के अभ्यास में सदैव तत्पर रहना चाहिए और शास्त्रों को सत्य मानकर भक्तिपूर्वक मन और इन्द्रियों को सदैव वश में रखना चाहिए। इस प्रकार सत्य के द्वारा ही मनुष्य मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकता है। 29॥   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.175.29 
तस्मात् सत्यव्रताचार: सत्ययोगपरायण:।
सत्यागम: सदा दान्त: सत्येनैवान्तकं जयेत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
अतः मनुष्य को सत्यव्रत का पालन करना चाहिए। सत्ययोग के अभ्यास में सदैव तत्पर रहना चाहिए और शास्त्रों को सत्य मानकर भक्तिपूर्वक मन और इन्द्रियों को सदैव वश में रखना चाहिए। इस प्रकार सत्य के द्वारा ही मनुष्य मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकता है। 29॥
 
Therefore, man should practice Satyavrata. One should always be ready to practice Satyayoga and should always control the mind and senses with devotion by accepting the scriptures as truth. Thus only through truth can man overcome death. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)