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mahabharat 12.175.28: सत्य के बिना कोई भी मनुष्य कभी भी मृत्यु की बढ़ती हुई सेना का सामना नहीं कर सकता; इसलिए असत्य का त्याग कर देना चाहिए। क्योंकि सत्य में ही अमरता निहित है ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.175.28 
न मृत्युसेनामायान्तीं जातु कश्चित् प्रबाधते।
ऋते सत्यमसत् त्याज्यं सत्ये ह्यमृतमाश्रितम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
सत्य के बिना कोई भी मनुष्य कभी भी मृत्यु की बढ़ती हुई सेना का सामना नहीं कर सकता; इसलिए असत्य का त्याग कर देना चाहिए। क्योंकि सत्य में ही अमरता निहित है ॥28॥
 
Without truth no man can ever face the advancing army of death; Therefore untruth should be abandoned. Because immortality lies in truth only. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)