Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.175.25: गाँव या नगर में रहते हुए जो स्त्री और सन्तान में आसक्ति उत्पन्न होती है, वह मृत्यु के मुख के समान है और जो वन में शरण लेता है, वह इन्द्रियरूपी गायों को बाँधने वाली गोशाला के समान है, ऐसा श्रुतिका का कथन है। | mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गाँव या नगर में रहते हुए जो स्त्री और सन्तान में आसक्ति उत्पन्न होती है, वह मृत्यु के मुख के समान है और जो वन में शरण लेता है, वह इन्द्रियरूपी गायों को बाँधने वाली गोशाला के समान है, ऐसा श्रुतिका का कथन है।
The attachment that is developed towards wife and child while living in a village or a city is like the mouth of death. And the one who takes refuge in a forest is like a cowshed for tying the cows in the form of senses, this is the statement of Shrutika.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥