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mahabharat 12.175.24: मनुष्य के जन्म लेते ही मृत्यु और बुढ़ापा उसका पीछा करने लगते हैं। सभी सजीव और निर्जीव प्राणी इन दोनों से बंधे हुए हैं॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.175.24 
जातमेवान्तकोऽन्ताय जरा चान्वेति देहिनम्।
अनुषक्ता द्वयेनैते भावा: स्थावरजङ्गमा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य के जन्म लेते ही मृत्यु और बुढ़ापा उसका पीछा करने लगते हैं। सभी सजीव और निर्जीव प्राणी इन दोनों से बंधे हुए हैं॥24॥
 
As soon as a mortal is born, death and old age start chasing him to end his life. All living and non-living creatures are bound by these two.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)