Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.175.22: चाहे वह निर्बल हो या बलवान, चाहे वीर हो या कायर, चाहे मूर्ख हो या विद्वान, मृत्यु उसकी सारी इच्छाएँ पूरी होने से पहले ही उसे ले जाती है ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.175.22 
दुर्बलं बलवन्तं च शूरं भीरुं जडं कविम्।
अप्राप्तं सर्वकामार्थान् मृत्युरादाय गच्छति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
चाहे वह निर्बल हो या बलवान, चाहे वीर हो या कायर, चाहे मूर्ख हो या विद्वान, मृत्यु उसकी सारी इच्छाएँ पूरी होने से पहले ही उसे ले जाती है ॥22॥
 
Be it a weak or a strong person, a valiant person or a coward, a fool or a learned person, death takes him away before all his desires are fulfilled. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)