Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.175.21: मनुष्य अपने खेत, दुकान और मकान में फंसा रहता है; उसे अपने कर्मों का फल भी नहीं मिलता; उससे पहले ही मृत्यु कर्मों में लिप्त मनुष्य को ले जाती है ॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य अपने खेत, दुकान और मकान में फंसा रहता है; उसे अपने कर्मों का फल भी नहीं मिलता; उससे पहले ही मृत्यु कर्मों में लिप्त मनुष्य को ले जाती है ॥21॥
A man remains trapped in his farm, shop and house; he does not even get the fruits of his deeds; before that, death takes away the man involved in his deeds. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥