Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.175.20: मनुष्य सोचता है कि यह कार्य पूरा हो गया, यह अभी करना है और यह अधूरा रह गया - इस प्रकार पुरुषार्थ से उत्पन्न भोगों में आसक्त मनुष्य काल के द्वारा बंदी हो जाता है ॥20॥ | mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य सोचता है कि यह कार्य पूरा हो गया, यह अभी करना है और यह अधूरा रह गया - इस प्रकार पुरुषार्थ से उत्पन्न भोगों में आसक्त मनुष्य काल के द्वारा बंदी हो जाता है ॥20॥
Man thinks that this work is complete, this one is yet to be done and this one remains unfinished - in this way, man who is addicted to the pleasures resulting from efforts is captured by time. ॥20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥