Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.175.17: जो मनुष्य मोह में डूबा हुआ है, वह स्वयं ही अपने पुत्र और स्त्री के लिए प्रयत्न करने लगता है और करने योग्य और न करने योग्य कार्यों द्वारा उनका भरण-पोषण करता है ॥17॥ | mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मोहेन हि समाविष्ट: पुत्रदारार्थमुद्यत:।
कृत्वा कार्यमकार्यं वा पुष्टिमेषां प्रयच्छति॥ १७॥
अनुवाद
जो मनुष्य मोह में डूबा हुआ है, वह स्वयं ही अपने पुत्र और स्त्री के लिए प्रयत्न करने लगता है और करने योग्य और न करने योग्य कार्यों द्वारा उनका भरण-पोषण करता है ॥17॥
A man who is drowned in attachment, he himself starts making efforts for his son and wife and supports them by doing things which are to be done and not to be done. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥