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mahabharat 12.175.11: जब जीवन प्रत्येक बीतती रात के साथ छोटा होता जा रहा है, तो उथले पानी में रहने वाली मछली की तरह खुशी कौन पा सकता है?   |   mahabharat अध्याय 12.175: अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषका क्या कर्तव्य है, इस विषयमें पिताके प्रति पुत्रद्वारा ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.175.11 
रात्र्यां रात्र्यां व्यतीतायामायुरल्पतरं यदा।
गाधोदके मत्स्य इव सुखं विन्देत कस्तदा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब जीवन प्रत्येक बीतती रात के साथ छोटा होता जा रहा है, तो उथले पानी में रहने वाली मछली की तरह खुशी कौन पा सकता है?
 
When life is getting shorter with each night that passes, who can find happiness like the fish living in shallow water?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)