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mahabharat 12.174.d3: दुष्ट बुद्धि वाला मूर्ख मनुष्य अपने कर्मों के अच्छे-बुरे फल की चिंता न करके सुखपूर्वक सोता है; क्योंकि वह कम्बल से ढके हुए मनुष्य के समान महान अज्ञान से ढका रहता है।   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.174.d3 
(सुखं स्वपिति दुर्मेधा: स्वानि कर्माण्यचिन्तयन्।
अविज्ञानेन महता कम्बलेनेव संवृत:॥ )
 
 
अनुवाद
दुष्ट बुद्धि वाला मूर्ख मनुष्य अपने कर्मों के अच्छे-बुरे फल की चिंता न करके सुखपूर्वक सोता है; क्योंकि वह कम्बल से ढके हुए मनुष्य के समान महान अज्ञान से ढका रहता है।
 
A foolish man with an evil mind sleeps happily, not caring about the good or bad results of his actions; Because he remains covered with great ignorance like a man covered with a blanket.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)