Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.d2: मैं अकेला हूँ। न मैं किसी और का हूँ, न मैं किसी और का हूँ। न मैं जिसका हूँ, उसे देखता हूँ और न मैं उसे देखता हूँ जो मेरा है (न किसी को मुझसे स्नेह है, न मुझे किसी से स्नेह है)। | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(अहमेको न मे कश्चिन्नाहमन्यस्य कस्यचित्।
न तं पश्यामि यस्याहं तं न पश्यामि यो मम॥ )
अनुवाद
मैं अकेला हूँ। न मैं किसी और का हूँ, न मैं किसी और का हूँ। न मैं जिसका हूँ, उसे देखता हूँ और न मैं उसे देखता हूँ जो मेरा है (न किसी को मुझसे स्नेह है, न मुझे किसी से स्नेह है)।
I am alone. Neither do I belong to anyone else nor do I belong to anyone else. I do not see the person to whom I belong and I do not see the one who belongs to me (neither does anyone have affection for me, nor do I have affection for anyone).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥