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mahabharat 12.174.7: भीष्म बोले, "पुत्र! जब धन का नाश हो जाए अथवा स्त्री, पुत्र या पिता की मृत्यु हो जाए, तब 'हाय! यह संसार कितना दुःखमय है' ऐसा विचार करके मनुष्य को शोक दूर करने के लिए शम-दम आदि अनुष्ठान करने चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.174.7 
भीष्म उवाच
नष्टे धने वा दारे वा पुत्रे पितरि वा मृते।
अहो दु:खमिति ध्यायन् शोकस्यापचितिं चरेत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "पुत्र! जब धन का नाश हो जाए अथवा स्त्री, पुत्र या पिता की मृत्यु हो जाए, तब 'हाय! यह संसार कितना दुःखमय है' ऐसा विचार करके मनुष्य को शोक दूर करने के लिए शम-दम आदि अनुष्ठान करने चाहिए।
 
Bhishma said, "Son, when wealth is destroyed or a wife, son or father dies, then thinking, 'Oh! How sorrowful this world is', a man should perform the rituals of Shama-Dam etc. to remove grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)