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युधिष्ठिर उवाच
नष्टे धने वा दारे वा पुत्रे पितरि वा मृते।
यया बुद्धॺा नुदेच्छोकं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ ६॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - "पितामह! जब धन नष्ट हो जाए, पत्नी, पुत्र या पिता की मृत्यु हो जाए, तो मनुष्य को अपने शोक से कैसे उबरना चाहिए?" कृपया मुझे यह बताइए।
Yudhishthira asked - Grandfather! How should a man overcome his grief when his wealth is lost or when his wife, son or father dies? Please tell me this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥