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mahabharat 12.174.6: युधिष्ठिर ने पूछा - "पितामह! जब धन नष्ट हो जाए, पत्नी, पुत्र या पिता की मृत्यु हो जाए, तो मनुष्य को अपने शोक से कैसे उबरना चाहिए?" कृपया मुझे यह बताइए।   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.174.6 
युधिष्ठिर उवाच
नष्टे धने वा दारे वा पुत्रे पितरि वा मृते।
यया बुद्धॺा नुदेच्छोकं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ ६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - "पितामह! जब धन नष्ट हो जाए, पत्नी, पुत्र या पिता की मृत्यु हो जाए, तो मनुष्य को अपने शोक से कैसे उबरना चाहिए?" कृपया मुझे यह बताइए।
 
Yudhishthira asked - Grandfather! How should a man overcome his grief when his wealth is lost or when his wife, son or father dies? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)