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mahabharat 12.174.58: पिंगला बोली, "मेरा सच्चा प्रियतम बहुत समय से मेरे पास ही रहता है। मैं सदैव उसके साथ ही रहती आई हूँ। वह कभी पागल नहीं होता; किन्तु मैं इतनी मदहोश थी कि आज से पहले उसे पहचान ही नहीं सकी।"   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.174.58 
पिङ्गलोवाच
उन्मत्ताहमनुन्मत्तं कान्तमन्ववसं चिरम्।
अन्तिके रमणं सन्तं नैनमध्यगमं पुरा॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
पिंगला बोली, "मेरा सच्चा प्रियतम बहुत समय से मेरे पास ही रहता है। मैं सदैव उसके साथ ही रहती आई हूँ। वह कभी पागल नहीं होता; किन्तु मैं इतनी मदहोश थी कि आज से पहले उसे पहचान ही नहीं सकी।"
 
Pingala said, "My true beloved has been living near me for a long time. I have always lived with him. He never goes mad; but I was so intoxicated that I could not recognize him before today."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)