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mahabharat 12.174.52: जब वह किसी से नहीं डरता और न कोई उससे डरता है; तथा जब वह न किसी वस्तु की इच्छा करता है और न उससे द्वेष करता है, तब वह परम ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है ॥ 52॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.174.52 
न बिभेति यदा चायं यदा चास्मान्न बिभ्यति।
यदा नेच्छति न द्वेष्टि ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
जब वह किसी से नहीं डरता और न कोई उससे डरता है; तथा जब वह न किसी वस्तु की इच्छा करता है और न उससे द्वेष करता है, तब वह परम ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है ॥ 52॥
 
When he does not fear anyone and no one fears him; and when he neither desires anything nor hates it, then he attains the Supreme Brahma, the Supreme Being. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)