Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.50: हृदय से उत्पन्न यह कामना हृदय में ही दृढ़ होकर मृत्यु का रूप धारण कर लेती है। क्योंकि (जब इसकी सिद्धि में कोई बाधा आती है, तब) इसे जीवों के शरीर में क्रोध के नाम से विद्वान लोग कहते हैं ॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हृदय से उत्पन्न यह कामना हृदय में ही दृढ़ होकर मृत्यु का रूप धारण कर लेती है। क्योंकि (जब इसकी सिद्धि में कोई बाधा आती है, तब) इसे जीवों के शरीर में क्रोध के नाम से विद्वान लोग कहते हैं ॥50॥
This desire which is born from the heart gets strengthened in the heart itself, then it takes the form of death. Because (when there is some obstacle in its accomplishment, then) it is called by the learned as anger in the body of the living beings. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥