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mahabharat 12.174.5: युधिष्ठिर! यह संसार अनेक दोषों से युक्त है, ऐसा निश्चय करके बुद्धिमान् पुरुष को अपने मोक्ष के लिए प्रयत्न करना चाहिए ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.174.5 
एवं व्यवसिते लोके बहुदोषे युधिष्ठिर।
आत्ममोक्षनिमित्तं वै यतेत मतिमान् नर:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! यह संसार अनेक दोषों से युक्त है, ऐसा निश्चय करके बुद्धिमान् पुरुष को अपने मोक्ष के लिए प्रयत्न करना चाहिए ॥5॥
 
Yudhishthira! Having decided that this world is full of many defects, a wise man should strive for his salvation. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)