Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.49: ऐसी बुद्धि का आश्रय लेकर कामनाओं का त्याग करने वाले गुण से युक्त पुरुष सुखपूर्वक रहता है; अतः उसे सभी प्रकार के सुखों से विरक्त होकर उनसे विमुख हो जाना चाहिए, अर्थात् उनसे विमुख हो जाना चाहिए ॥ 49॥ | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसी बुद्धि का आश्रय लेकर कामनाओं का त्याग करने वाले गुण से युक्त पुरुष सुखपूर्वक रहता है; अतः उसे सभी प्रकार के सुखों से विरक्त होकर उनसे विमुख हो जाना चाहिए, अर्थात् उनसे विमुख हो जाना चाहिए ॥ 49॥
Having taken recourse to such wisdom, a man endowed with the virtue of renouncing desires lives happily; therefore, being detached from all kinds of pleasures, he should turn his back on them, i.e., turn away from them. ॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥