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mahabharat 12.174.44: जब मनुष्य किसी वस्तु में आसक्ति उत्पन्न कर लेता है, तब वे सभी वस्तुएँ उसके दुःख का कारण बन जाती हैं ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.174.44 
किंचिदेव ममत्वेन यदा भवति कल्पितम्।
तदेव परितापार्थं सर्वं सम्पद्यते तथा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जब मनुष्य किसी वस्तु में आसक्ति उत्पन्न कर लेता है, तब वे सभी वस्तुएँ उसके दुःख का कारण बन जाती हैं ॥ 44॥
 
When a man develops attachment to any object, then all those objects become the cause of his suffering. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)